परमेश्वर की महिमा सर्वत्र फैलती है !

B. A. Manakala

हे परमेश्‍वर, तू स्वर्ग के ऊपर प्रतापी और महान हो; तेरी महिमा समस्त पृथ्वी पर फैल जाए। भजन 57:5

'यह जलने की गंध क्या है', हम सब लोग घर के सभी कोनों से बाहर आकर एक दूसरे से पूछने लगे। अंत में, हमें पता चला कि मैं स्टोव पर कुछ रख कर भूल गया था! जलने की गंध पूरे घर में ही नहीं, शायद पड़ोस में भी फैल गई थी।

परमेश्वर की महिमा समस्त पृथ्वी पर फैलती है (भजन 57:5,11; 108:5), परमेश्वर की महिमा स्वर्गों से भी ऊपर है (भजन 8:1)। परमेश्वर हर जगह मौजूद हैं और कोई भी मनुष्य कभी-भी परमेश्वर से छिपने का स्थान खोज नहीं सकता (यिर्म 23:24)। यहाँ तक ​​कि जो लोग कहते हैं कि 'कोई खुदा नहीं है' उन्हें भी परमेश्वर की महिमा में ही रहना होगा। युद्ध, अकाल, बाढ़ या महामारी, चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर की महिमा पृथ्वी को भर देती है।

आप अपने जीवन के हर दिन में परमेश्वर की महिमा का अनुभव कैसे करते हैं?

परमेश्वर ने प्रकाश और अंधकार, दोनों की सृष्टि की (यशा 45:7); परन्तु परमेश्वर ने जो सीमाएँ तय की हैं, उसके आगे तक अंधेरा फैल नहीं सकता!

प्रार्थना: प्यारे प्रभु जी, इस पृथ्वी पर आने वाले सभी संकट के मध्य में भी मैं आपकी महिमा को निहारना चाहता हूँ। आमीन!

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