सच्चा न्याय!

B. A. Manakala

हे शासको, क्या तुम वास्तव में न्याय की बातें बोलते हो? हे मनुष्य के पुत्रो, क्या तुम खराई से न्याय करते हो? भजन 58:1

"मुझे चार घंटे ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ना होता है; परन्तु उसको (छोटा भाई) प्रत्येक दिन केवल 45 मिनट की ही कक्षा होती है। क्या यह न्याय है?" मेरी बेटी पूछती है।

दाऊद अपने समय के शासकों से पूछ रहा है कि क्या वे वास्तव में न्याय के लिए खड़े हैं (भजन 58:1)। वह उनके खुद के अन्याय पर उनका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है (भजन 58:2)। 

क्या धन, शक्ति और प्रभाव से न्याय को हराया जा सकता है? साधारण तौर पर, सब न्याय को पसन्द करते हैं। मैं सही ढंग से न्याय के साथ कहता हूँ, मेरे पड़ोसी की नज़र में जो कुछ भी है वह एक लट्ठा है, हालांकि वो वास्तव में धूल ही है! लेकिन समस्या यह है कि, मानवीय दृष्टिकोण में, एक व्यक्ति के लिए जो न्याय होता है वो दूसरे के लिए अन्याय हो सकता है!

न्याय को परिभाषित करने के लिए आपका मापदंड क्या है? आप निष्पक्ष रूप से कैसे न्याय करेंगे?

सच्चा न्यायाधीश ही केवल सच्चा न्याय कर सकते हैं!

प्रार्थना: प्रेमी परमेश्वर, मेरे सच्चे न्यायी, मुझे निष्पक्ष रूप से न्याय करना सिखाइए। आमीन!

(Translated from English to Hindi by S. R. Nagpur)

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