आप कहाँ आराधना करते हैं ?

B. A. Manakala

हे प्रभु, देश देश के लोगों के मध्य मैं तेरा धन्यवाद करूँगा; राज्य राज्य के मध्य मैं तेरी स्तुति-प्रशंसा के गीत गाऊँगा। भजन 57:9

मैंने इस महामारी के दौरान कम-से-कम कुछ लोगों को एक बात कहते सुना कि, "चर्च न जाते हुए घर में ही परमेश्वर की आराधना करना मुझे बहुत अप्रिय महसूस हो रहा है"।

दाऊद कहता है कि वह सभी देश के लोगों और सभी राज्यों के मध्य परमेश्वर की स्तुति-प्रशंसा करेगा (57: 9), चाहे वे लोग किसी भी धर्म के क्यों न हों। वैसे भी, पृथ्वी कभी-भी हमारे लिए परमेश्वर की आराधना करने के लिए एक सुखद जगह नहीं होने वाली है! परमेश्वर के महान सेवकों ने पहाड़ों पर, पेड़ों के नीचे, जेल में और कहीं भी परमेश्वर की आराधना की।

हम किसी भी तरह के लोगों के मध्य में, किसी भी संदर्भ में और किसी भी संस्कृति में, हर जगह, परमेश्वर की आराधना करने के लिए बुलाए गए हैं।

आपके पास आराधना करने के लिए उपयुक्त स्थान न होने पर भी, आप हर अवस्था में परमेश्वर की आराधना करने के लिए स्वयं को कैसे प्रशिक्षित करेंगे?

चाहे आराधना करने का स्थान आरामदायक न भी हो, तोभी सच्चाई से आराधना करने वाले लोग कहीं भी परमेश्वर की आराधना कर सकते हैं।

प्रार्थना: प्यारे प्रभु जी, आप मुझे कहीं भी और हर जगह, यहाँ तक ​​कि सबसे अप्रिय जगह में भी आपकी आराधना करना सिखाइए। आमीन!

(Translated from English to Hindi by S. R. Nagpur)

Comments

Popular posts from this blog

What is your good name?

Who is truly wise?

God doesn’t exist!?